बुधवार, 30 सितंबर 2015

Sabute-e-mohabbat

थी इतनी मोहब्बत हमे उनसे ,ना थी जितनी उन्हें हमसे।
 ना दे सके सबूत-ये -मोहब्बत , जब चाहा उन्होंने हमसे।।            
       
           थी उम्मीद उन्हें हमसे की
           उनकी मोहब्बत में हम सब कुछ कर जायेंगे  
         ना दे सके सबूत-ये-मोहब्बत         
  तो प्यार क्या निभाएंगे।


 ना बात कर उन्होंने चाहा, 
 देखें की प्यार करते है कितना वो हमसे
 ना जान सके उनके हाल-ये-दिल को, 
अब उनकी नज़रो में बेवफा हम हो गए। 

          हुयी जो बाते  मुद्दत से, पूछा जब हमने उनसे
        हुयी क्या खता हमसे, कह कर एक बात टाल दिया 
               "क्या प्यार निभाओगे तुम हमसे "


ना मैंने ये सोचा था के ऐसा दिन भी आएगा
 प्यार किया हमने जिसे दिल से
 वो साथ हमारा यूँ छोड़ जायेगा 


               थी इतनी मोहब्बत हमे उनसे ,ना थी जितनी उन्हें हमसे।
                ना दे सके सबते-मोहब्बत , जब चाहा उन्होंने हमसे।।



दिलीप कुमार पाण्डेय 



        

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