सोमवार, 28 सितंबर 2015

Chahat

चाहता हूँ बारे में तेरे लिखना ,सोचता हूँ, मैं  क्या लिखू
  जो खुद एक कलमा  है,उसे कलमा,  मै क्या लिखूं

         चाहता हूँ बारे में तेरे लिखना, सोचता हूँ  मैं  क्या लिखू

जो खुद है एक ग़ज़ल उसे ग़ज़ल, मै क्या लिखूं
खुशबु है जिसकी सासों  में ,उसकी महक,मै  क्या लिखू

      चाहता हूँ बारे में तेरे लिखना, सोचता हूँ मैं  क्या लिखू ..........

आँखों में है जिसकी लाखो बाते, उसकी बाते  मै  क्या लिखू
जुल्फों में जिसके है घटा , उसको बदल  मै क्या लिखू

         चाहता हूँ बारे में तेरे लिखना, सोचता हूँ  मैं क्या लिखू ..........

होठो पर खिलती है, जब मुश्कान उसके
दिलो में एक चाहत बन जाता है
जो खुद एक चाहत है मेरी , उसकी चाहत में ,मै  क्या लिखू

        चाहता हूँ बारे में तेरे लिखना, सोचता हूँ  मैं  क्या लिखू ..........

पलके उठा कर जब उसकी नज़रे  देखती है मुझको ,
दिल में एक अरमान सा जग  जाता है
जिसे  पाने का अरमान है मेरा , उसके अरमानो का   मै क्या लिखूं

       चाहता हूँ बारे में तेरे लिखना, सोचता हूँ  मैं  क्या लिखू ..........


                         
                                                                                                   
                                                                                                             दिलीप  कुमार



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