परिंदा बन जाऊ चाहत है मेरी।
ख्वाबो के आसमान में उड़ना चाहूँ।।
न हो किसी की आरज़ू पाने की मेरी।
बस खुद के लिए ही जीना चाहूँ।।
ख्वाबो के आसमान में उड़ना चाहूँ।।
न हो किसी की आरज़ू पाने की मेरी।
बस खुद के लिए ही जीना चाहूँ।।
कुछ उलझे से सावाल नज़र आते है, न दिन न रात बस खयाल नज़र आते है, हो तेरी हर बातो में जबाब मेरे सरे सवालो का, बस यही दिलो...
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