सोमवार, 14 मार्च 2016

Bas ak tu

शहर सुनसान पड़े थे।
राहे अनजान से थे।।
मंजिल बस एक तू ही थी
और हम खो गए।

चाहतो के तस्वीर थे।
अरमान दिलो  में थे।। 
दूर तलाक निगाह में तू ही थी ।
और हम खो गए ।।

रूबरू हम तुझसे हुए ।
ताल्लुक सा तुझसे बना।। 
दीदार- ए -हुश्न तेरा हुआ ।
और हम खो गए।। 

शहर सुनसान पड़े थे।
राहे अनजान से थे।।
मंजिल बस एक तू ही थी
और हम खो गए।

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