एक दिन खुद से खुद की बाते जो की
पता चला उसे पाने की चाह में
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.खुद को भुला बैठा हूँ।
पता चला उसे पाने की चाह में
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.खुद को भुला बैठा हूँ।
कुछ उलझे से सावाल नज़र आते है, न दिन न रात बस खयाल नज़र आते है, हो तेरी हर बातो में जबाब मेरे सरे सवालो का, बस यही दिलो...
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