ना थी हुकूमते दिल
पहरा किसी का
चाहत के आगे
सब बेबस नज़र आया
मुदद्त हुआ उस ज़माने को
जिस पल खुद को खुद
के साथ हमने पाया
कुछ उलझे से सावाल नज़र आते है, न दिन न रात बस खयाल नज़र आते है, हो तेरी हर बातो में जबाब मेरे सरे सवालो का, बस यही दिलो...
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