बुधवार, 23 सितंबर 2015

Dard

katal humara huaa..
gawahi bhi humne dii..
adalat unki lagi
aur
vo Bari ho gye.....

कत्तल हमारा हुआ ,गवाही भी हमने दी
अदालत उनकी लगी और वो बरी हो गए ……


बेकसूर हम थे
दुनिया मेरी उजड़ गयी
बर्बाद हम हुए और
उंहोने आशियाना बसा लिया …।

खुद को इतना अकेला न पाया
रहते हुए साथ तुम्हारे
ज़िंदगी ने जीना सीखा दिया
बिन तेरे और साथ चाहत के तुम्हारे।


 अब तो दोस्तों उसके नाम से भी नफरत सी हो गयी है

 जिसके आने से कभी चहरे में ख़ुशी सी आ जाती थी

Zindgi lagne lagi thi asan 
Par kambakt ak khudgarz ne aa kar 
Sab barbad kar diya ......

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